स्वीडन का स्टार्टअप Flox Intelligence, पटरियों, रनवे और सड़कों से वन्यजीवों को दूर रखने वाला AI-संचालित उपकरण तैनात कर रहा है। इस प्रणाली में कैमरे जानवरों की प्रजाति पहचानते हैं और हालात के मुताबिक आवाज़ निकालते हैं। कंपनी की संस्थापक Sara Nozokova के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में ऐसे करीब 150 उपकरण काम कर रहे हैं। अक्टूबर 2026 में सैन फ्रांसिस्को में हुए TechCrunch Disrupt के स्टार्टअप मुकाबले “Startup Battlefield 200” में कंपनी को फाइनलिस्टों में चुना गया था।
आंकड़ों में: जानवरों और परिवहन बुनियादी ढांचे के बीच टकराव
वन्यजीवों और परिवहन बुनियादी ढांचे के बीच टकराव कोई असामान्य बात नहीं है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) के अनुमान के मुताबिक, 1990 से 2025 के दौरान वन्यजीवों से टकराव के कारण अमेरिकी नागरिक विमानन को औसतन हर साल करीब 272 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। फ्रांस की राष्ट्रीय रेल कंपनी SNCF का कहना है कि पटरियों पर भटककर आए जानवरों के कारण हर साल 8,000 से अधिक ट्रेनें प्रभावित होती हैं और यह देरी के पांच सबसे बड़े कारणों में शामिल है। अकेले ब्रिटनी क्षेत्र में 2023 में 120 ट्रेनें जानवरों से टकराईं, जिससे 660 ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और कुल देरी 15,000 मिनट से अधिक रही।
संस्थापक Nozokova की इस समस्या में दिलचस्पी पैदा होने की वजह भी यादगार है। उनके मुताबिक, जब वह आठ साल की थीं, तब मुंबई जा रही एक ट्रेन तेज़ आवाज़ के साथ रुक गई और दोबारा चलने में करीब आठ घंटे लग गए। बताया जाता है कि पटरियों के पास एक शाखा में जंगली बाइसन की पूंछ फंस गई थी। वह इसे ग्रामीण भारत की खास घटना समझती थीं, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि ऐसा दुनिया में कहीं भी हो सकता है।
सायरन, रोशनी, बाड़, शिकारी पक्षी और जानवरों को मारना—अब तक के उपायों का मूल विचार जानवरों को परेशान करके दूर भगाना रहा है। Nozokova को लगा कि “जवाब और तेज़ आवाज़ नहीं है”, क्योंकि इन उपायों की अपनी सीमाएं हैं।
तेज़ आवाज़ नहीं, जानवरों के मुताबिक प्रतिक्रिया
Flox का उपकरण सबसे पहले गति सेंसर से किसी हलचल का पता लगने पर सक्रिय होता है। इसके बाद कैमरा चालू होता है और उपकरण में मौजूद AI मॉडल पास के जानवर की प्रजाति पहचानता है। फिर उस प्रजाति के मुताबिक आवाज़ निकालकर उसे दूर भगाया जाता है।
खास बात यह है कि हर बार एक ही आवाज़ नहीं निकाली जाती। एक ही उत्तेजना बार-बार मिलने पर जानवर उसके आदी हो जाते हैं। Nozokova बताती हैं कि उपकरण मौके पर मिले अनुभवों से सीखता है और अपनी प्रतिक्रिया के तौर-तरीके बदलता रहता है। शहरों में कबूतरों की तरह, जो लोगों से बचना छोड़ देते हैं, जानवरों का अभ्यस्त हो जाना डराकर भगाने वाले उपायों की सबसे बड़ी कमजोरी है।
यह भी अहम है कि यह “एज AI” है, यानी डेटा का प्रसंस्करण क्लाउड के बजाय मौके पर मौजूद उपकरण में होता है। इसे पटरियों के किनारे, खेतों और राष्ट्रीय उद्यानों जैसी जगहों पर लगाया जाता है, जहां संचार नेटवर्क स्थिर नहीं हो सकता। वीडियो दूर भेजे बिना मौके पर ही फैसला लेकर कार्रवाई करना, बाहर इस्तेमाल की वास्तविक परिस्थितियों के मुताबिक बनाया गया डिज़ाइन है।
स्वचालित ड्राइविंग का वह “ब्लाइंड स्पॉट” जिसे Nozokova ने देखा
Nozokova ने परिवहन और स्वचालित ड्राइविंग के क्षेत्र में 13 साल काम किया है। इस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि इंसानों के तैयार किए हुए माहौल में मशीनें अच्छा काम करती हैं, लेकिन प्रकृति के दखल देते ही उलझ जाती हैं। उनका मानना है कि शहरों, फैक्टरी की उत्पादन लाइनों और गोदामों के विपरीत, जहां बनावट तय होती है और वस्तुएं जानी-पहचानी होती हैं, प्रकृति जटिल और लगातार बदलती रहती है।
इसके बाद वह स्टॉकहोम स्थित KTH Royal Institute of Technology की AI लैब से जुड़ीं और जानवरों के व्यवहार व प्रजाति के मुताबिक प्रतिक्रिया बदलने वाली प्रणाली पर शोध शुरू किया। 2020 में KTH से स्पिनआउट होकर यही पहल Flox Intelligence बनी।
परिवहन बुनियादी ढांचे से आगे भी इस्तेमाल
कंपनी के मुताबिक, उसके करीब 150 उपकरण हवाई अड्डों के आसपास, सड़कों और रेलवे लाइनों के किनारे, राष्ट्रीय उद्यानों, खेतों, शहरी इलाकों, खदानों और सबस्टेशनों जैसी अहम बुनियादी सुविधाओं पर काम कर रहे हैं। रेलवे और सड़कों पर इन्हें मुख्य रूप से उन बाड़ों के सिरों और समपारों पर लगाया जाता है, जहां वन्यजीवों के आवाजाही मार्ग गुजरते हैं। ये बैटरी से चलते हैं और खंभों या पेड़ों पर लगाए जा सकते हैं।
कंपनी का दूसरा प्रमुख कारोबार सॉफ्टवेयर है। इससे उपकरणों की स्थापना वाली जगह और मौके के हालात देखे जा सकते हैं। इसका उपयोग नियामकीय अनुपालन से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने और जैव विविधता की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। यानी यह केवल जानवरों को भगाने वाला उपकरण नहीं, बल्कि मौके पर उनके आवागमन को दर्ज करने वाला सेंसर नेटवर्क भी है।
लंबी अवधि में कंपनी की योजना इस सॉफ्टवेयर को ट्रेन, कार और ड्रोन जैसी बाहर चलने वाली मशीनों में इस्तेमाल करने लायक बनाने की है। स्थिर उपकरणों से चलती मशीनों की “आंखों” तक—कंपनी वन्यजीवों को दूर रखने से आगे के इस्तेमाल की संभावनाएं देख रही है।
क्या प्रकृति को समझने वाला AI अगला परसेप्शन प्लेटफॉर्म बन सकता है?
कंपनी के कारोबार में उपकरणों की बिक्री के साथ, उन्हें लगाने के दूसरे साल से सालाना सॉफ्टवेयर और AI शुल्क लेना शामिल है। ट्रेन जैसे वाहनों में सॉफ्टवेयर लगाने वाली कंपनियों के साथ वह OEM साझेदारी करती है और उनसे सालाना शुल्क लेती है। रेल वाहन निर्माता Alstom उसके साझेदारों में से एक है। Nozokova का कहना है कि कंपनी को 2026 के अंत तक करीब 1.5 मिलियन डॉलर के राजस्व की उम्मीद है।
वित्तपोषण के मोर्चे पर, कंपनी प्री-सीड और सीड चरणों में अब तक लगभग 5 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है। सीड राउंड का नेतृत्व Unconventional Ventures और Tilia Impact Ventures ने किया, जबकि GENIUS NY, Norrsken, Satgana और एंजेल निवेशकों ने भी इसमें हिस्सा लिया। अब कंपनी 10 मिलियन डॉलर के सीरीज़ A राउंड की शुरुआत कर रही है। योजना है कि इस पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से मौजूदा लगभग 150 इकाइयों से बढ़कर हजारों इकाइयों तक विस्तार करने और वन्यजीवों से आगे अन्य उपयोगों तक दायरा बढ़ाने में किया जाए।
इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी भी हैं। Robin Radar का Scarecrow प्रजाति-विशिष्ट चेतावनी ध्वनियों से पक्षियों को भगाता है और उनकी गतिविधि दर्ज करता है। iCHASE कंप्यूटर विज़न से पक्षियों का पता लगाकर उन्हें चलती हुई लेज़र से भगाने वाली प्रणाली बेचता है। नोज़कोवा के मुताबिक, उनकी कंपनी की ताकत प्रणाली की व्यापकता और मैदान में जुटाया गया डेटा है। वह इसे इस बात का “मैदानी ग्राउंड-ट्रुथ डेटा” बताती हैं कि किन परिस्थितियों में मूस और ग्रिज़ली भालू सुरक्षित रूप से आवाजाही करते हैं।
नोज़कोवा कहती हैं कि फिजिकल AI कारखानों से निकलकर अव्यवस्थित और जीव-जंतुओं से भरे बाहरी परिवेश में पहुंच रहा है। ट्रेन, ट्रक, ड्रोन, ट्रैक्टर और रोबोट जैसी बाहर काम करने वाली मशीनों को अंततः प्रकृति को समझना होगा। उनका तर्क है कि “प्रकृति की बुद्धिमत्ता” पहचान तकनीक की अगली परत होगी। स्वचालित ड्राइविंग ने लोगों और कारों में अंतर पहचानने की क्षमता को निखारा है, लेकिन वन्यजीवों की पहचान और उनके व्यवहार का अनुमान लगाना अब भी एक कम विकसित क्षेत्र है। क्या इस कमी को भरने वाली तकनीक दुर्घटनाएं घटाते हुए जानवरों को चोट से बचाने का विकल्प बन सकती है? हजारों इकाइयों तक विस्तार इस सवाल का जवाब देगा।


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