YouTube Music ने ऐसे लेबल शुरू करने की घोषणा की है, जिनसे जनरेटिव AI की मदद से बने गीतों को एक नज़र में पहचाना जा सकेगा। लेबल प्लेबैक स्क्रीन पर दिखाई देंगे। उन पर टैप करने से पता चलेगा कि निर्माण के किस हिस्से में AI शामिल था। इसी तरह के लेबल YouTube के मुख्य ऐप में भी दिखाई देंगे।
प्लेबैक स्क्रीन पर दिखेगी AI की भूमिका
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ़ यह नहीं बताया जाएगा कि AI का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इससे यह भी पता चल सकेगा कि AI ने किस चरण में भूमिका निभाई—जैसे संगीत रचना या गायन।
लेबल रोज़मर्रा में दिखने वाली प्लेबैक स्क्रीन पर होंगे। यानी यह जानकारी सेटिंग्स में कहीं छिपी नहीं रहेगी, बल्कि गाना सुनते समय सहज ही नज़र आएगी।
YouTube ने घोषणा की है कि वह यह सुविधा अपने मुख्य ऐप में भी लाएगा। इस तरह यह उन लोगों तक भी पहुँचेगी जो संगीत के लिए अलग ऐप का इस्तेमाल नहीं करते। वीडियो और संगीत को जोड़ने वाला यह YouTube के लिए स्वाभाविक कदम है।
AI की भूमिका को तीन श्रेणियों में बाँटा गया
संगीत साझेदार अपने काम के लिए तीन में से एक श्रेणी चुनकर जानकारी दे सकते हैं: “Fully Gen AI”, “Partly Gen AI” या “No Gen AI”।
“Fully Gen AI” उन मामलों के लिए है जिनमें पूरा गीत AI से तैयार किया गया हो। “Partly Gen AI” उन रचनाओं को दर्शाता है जिनमें AI से बने तत्व शामिल हों, लेकिन कलाकार ने लाइव वादन जैसी चीज़ें भी जोड़ी हों। वहीं, “No Gen AI” में Auto-Tune जैसे पिच-सुधार टूल से संवारे गए गीत शामिल हैं।
यहाँ वर्गीकरण की बारीकी अहम है। पिच-सुधार स्टूडियो में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली तकनीक है और इसे जनरेटिव AI से अलग माना गया है। आज जब AI शब्द को अक्सर एक ही श्रेणी में रख दिया जाता है, तब यह स्पष्टता श्रोताओं की गलतफ़हमियाँ कम कर सकती है।
सिर्फ़ स्व-घोषणा पर निर्भर नहीं
YouTube का कहना है कि वह संगीत साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा और AI से बने संगीत की पहचान के लिए अपने डिटेक्शन टूल भी इस्तेमाल करेगा।
अगर व्यवस्था सिर्फ़ स्व-घोषणा पर निर्भर हो, तो जानकारी न देने वालों को फ़ायदा मिल सकता है। डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल लेबल की विश्वसनीयता को सहारा देने का आधार तैयार करता है। श्रोताओं के लिए लेबल मौजूद है या नहीं, यह निर्णय लेने का एक संकेत होगा। इसलिए पर्दे के पीछे की यह व्यवस्था अहम साबित होगी।
अन्य कंपनियों का ‘हटाने’ का रास्ता और YouTube का ‘खुलासा’
AI से बने संगीत की बढ़ती आमद सभी कंपनियों के लिए साझा चुनौती है, लेकिन उनकी प्रतिक्रियाओं में अंतर है। Apple Music अपनी AI Transparency Tags पहल के तहत इस साल के उत्तरार्ध में “Made With AI” लेबल शुरू करने की योजना बना रहा है। Spotify में भी AI लेबल और संगीत स्पैम फ़िल्टर मौजूद हैं।
सबसे सख़्त रुख Deezer का है। उसने बताया कि जुलाई तक उसे हर दिन पूरी तरह AI से बने लगभग 90 हज़ार गीत मिल रहे थे। वह जिन गीतों का पता लगाता है, उन पर लेबल लगाता है और उन्हें एल्गोरिदम से मिलने वाली सिफ़ारिशों तथा संपादकीय प्लेलिस्ट से हटा देता है। धोखाधड़ी वाली स्ट्रीमिंग के लिए रॉयल्टी भी नहीं दी जाती। Deezer ऐसा विकल्प भी तैयार कर रहा है जिससे AI से बने संगीत को फ़िल्टर करके हटाया जा सके।
TIDAL भी उन रिकॉर्डिंग पर लेबल लगाता है जिन्हें वह पूरी तरह AI से बना हुआ मानता है। श्रोता उन्हें छिपा सकते हैं और उन्हें रॉयल्टी बाँटने की प्रक्रिया से भी बाहर रखा जाता है।
कमाई पर रोक न लगाने का रास्ता
इन कंपनियों के विपरीत, YouTube ने पूरी तरह रोक लगाने के बजाय जानकारी देने पर ज़ोर दिया है। नया लेबल श्रोताओं को यह बताने के लिए है कि AI की क्या भूमिका थी। सिर्फ़ AI के शामिल होने से कोई गीत कमाई के दायरे से बाहर नहीं होगा।
YouTube खुद भी AI की मदद से संगीत बनाने के प्रयोग कर रहा है। Dream Track एक ऐसा टूल है जिससे कुछ क्रिएटर इसमें शामिल कलाकारों की आवाज़ों की AI से नकल करके साउंडट्रैक बना सकते हैं।
एक ओर AI से बने संगीत को हटाने वाली कंपनियाँ हैं, तो दूसरी ओर वे हैं जो इसकी जानकारी देकर चुनाव श्रोताओं पर छोड़ती हैं। इनमें से कौन-सा रास्ता सही है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि श्रोता क्या चाहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे ‘AI या इंसान’ का दो-टूक बँटवारा कम कारगर होता जा रहा है, यह बताने का विचार कि किसने कौन-सी भूमिका निभाई, संगीत का आनंद लेने के तरीके बढ़ा सकता है। इस व्यवस्था की उपयोगिता स्व-घोषणा और डिटेक्शन की प्रक्रिया तथा लेबल की स्पष्टता पर निर्भर करेगी।


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